Saturday, September 29, 2012

मनुष्यत्व

ईश्वर की वर्तमान अवधारणा पर विचार करने पर पाता हूँ कि यह बहुत भ्रामक है। इस अवधारणा के अनुसार ईश्वर अपने भक्त की पुकार पर सहायता को सदैव तत्पर रहता है। इसके विपरीत सत्य यह है कि परम शक्ति या कहें प्रकृति अपने स्थापित नियमों से ही चलती है तथा भक्ति अथवा भजन जैसे किसी कारण से उनमें परिवर्तन को तैयार नहीं होती।
मान्यता यह है कि इश्वर ने मनुष्य को बनाया। यदि गहराई से विचार करें तो समझ में आयेगा कि तथाकथित इश्वर को मनुष्य ने बनाया है। मनुष्य ने अपने दुर्बल क्षणों में संबल के लिए इश्वर की अवधारणा को जन्म दिया।

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